Kobita
Hindi
आशे !
✍️ রচয়িতা: हरिवंशराय बच्चन
👁️ পাঠ সংখ্যা: 2
📅 প্রকাশিত: 11 Oct, 2026
(१)
भूल तब जाता दुख अनन्त,
निराशा पतझड़ का हो अन्त
हृदय में छाता पुन: वसन्त,
दमक उठता मेरा मुख म्लान
देवि ! जब करता तेरा ध्यान ।
(२)
पथिक जो बैठा हिम्मतहार,
जिसे लगता था जीवन भार,
कमर कसता होता तैयार,
पुन: उठता करता प्रस्थान,
देवि ! जब करता तेरा ध्यान ।
(३)
डूबते पा जाता आधार,
सरस होता जीवन निस्सार,
सार मय फिर होता संसार,
सरल हो जाते कार्य महान,
देवि ! जब करता तेरा ध्यान ।
(४)
शक्ति का फिर होता संचार,
सूझ पड़ता फिर कुछ-कुछ पार,
हाथ में फिर लेता पतवार,
पुन: खेता जीवन जल यान,
देवि ! जब करता तेरा ध्यान ।