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Kobita Hindi

नैराश्य

✍️ রচয়িতা: हरिवंशराय बच्चन 👁️ পাঠ সংখ্যা: 28 📅 প্রকাশিত: 12 Oct, 2026
(१) निशा व्यतीत हो चुकी कब की ! सूर्य किरण कब फूटी! चहल-पहल हो उठी जगत में, नींद न तेरी टूटी! (२) उठा उठा कर हार गई मैं, आँख न तूने खोली, क्या तेरे जीवन-अभिनय की सारी लीला हो ली ? (३) जीवन का तो चिन्ह यही है सो कर फिर जग जाना, क्या अनंत निद्रा में सोना नहीं मृत्यु का आना ? (४) तुझे न उठता देख मुझे है बार बार भ्रम होता-- क्या मैं कोई मृत शरीर को समझ रही हूँ सोता !

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